लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 25 फरवरी 2026 इंसानियत की एक प्रेरक मिसाल राजधानी में देखने को मिली, जहां 42 वर्षीय संदीप कुमार ने दुनिया से विदा लेते समय पांच लोगों को नई जिंदगी दे दी। उनका यह फैसला न सिर्फ उनके परिवार के साहस को दर्शाता है, बल्कि समाज को अंगदान के महत्व का भी संदेश देता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी को संदीप कुमार का सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences (पीजीआई) में भर्ती कराया गया, जहां उनका लगातार इलाज चलता रहा। हालांकि डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 22 फरवरी को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद डॉक्टरों ने संदीप की पत्नी और परिजनों से अंगदान के बारे में बातचीत की। शुरुआत में परिवार भावनात्मक रूप से तैयार नहीं था, लेकिन डॉक्टरों ने समझाया कि अंगदान से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसके बाद संदीप की पत्नी और परिवार ने साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दे दी।
डॉक्टरों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस प्रशासन के सहयोग से पीजीआई से King George’s Medical University (केजीएमयू) तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। लगभग 19 किलोमीटर की दूरी मात्र 18 मिनट में पूरी की गई, ताकि अंगों को समय पर पहुंचाया जा सके।
केजीएमयू में पहले से तैयार डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया। संदीप का लीवर केजीएमयू में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित किया गया, जबकि दोनों किडनियां पीजीआई में भर्ती दो अलग-अलग मरीजों को लगाई गईं। इसके अलावा उनकी आंखों के दान से दो अन्य लोगों की रोशनी लौट आई।
इस प्रकार संदीप कुमार के अंगदान से पांच लोगों को नया जीवन मिला। यह घटना न केवल मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण है, बल्कि समाज को यह प्रेरणा भी देती है कि अंगदान जैसे निर्णय से कई परिवारों में खुशियां लौटाई जा सकती हैं।
