इटावा:(द दस्तक 24 न्यूज़) 24 जून 2025 इटावा जिले के दान्दरपुर गांव में हुए जातिगत उत्पीड़न के मामले में आज पूर्व मंत्री और प्रखर सामाजिक न्यायवादी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भागवताचार्य श्री मणिकुमार यादव और संत कुमार यादव के साथ कथित ब्राह्मण समुदाय द्वारा किए गए अमानवीय व्यवहार की घोर निंदा करते हुए इसे हिंदू धर्म के दोहरे चरित्र का प्रमाण बताया।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा मणिकुमार और संत कुमार यादव को केवल इसलिए अपमानित किया गया क्योंकि वे चमार या यादव जाति से हैं और भागवत कथा कर रहे थे। उनके साथ सिर मुंडवाना, पिटाई करना, मूत्र छिड़कना और बंधक बनाकर प्रताड़ित करना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह साफ़ दर्शाता है कि कथित ‘हिंदू धर्म’ के ठेकेदार, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों को कभी भी बराबरी का दर्जा नहीं देना चाहते।
उन्होंने आगे कहा यदि वास्तव में हिंदू धर्म होता तो उसमें सभी जातियों – क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र – को ब्राह्मणों के समान सम्मान और धार्मिक अधिकार प्राप्त होते। लेकिन ऐसा नहीं है। यह धर्म नहीं, बल्कि ब्राह्मण धर्म है, जो सिर्फ ब्राह्मणों के हितों और आर्थिक धंधे पर आधारित है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस घटना को संविधान और कानून के खिलाफ बताते हुए यूपी की भाजपा सरकार से पूछा है कि क्या भाजपा सरकार, जो चुनावों के वक्त SC, ST और OBC को हिंदू बताकर वोट मांगती है, अब इन पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दोषियों की गिरफ्तारी कराएगी या चुप्पी साधे रहेगी ?
उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि इस वीभत्स कुकृत्य को जातिगत घृणा और धार्मिक वर्चस्व का नंगा नाच बताया, और मांग की कि दोषियों पर SC/ST एक्ट और IPC की कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। यह घटना अब सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर बड़ी बहस को जन्म दे रही है। क्या भाजपा सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएगी या सामाजिक न्याय के संघर्ष को एक बार फिर नज़रअंदाज़ किया जाएगा – यह आने वाला वक्त बताएगा।
