एक क्लिक पर खत्म हो रही कमाई : आदर्श कुमार

सोशल मीडिया के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्मों की बाढ़ आ गई है, जो ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को झांसा देकर भारी रकम ठग लेते हैं। इसके कारण लोगों को अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई को गंवाना पड़ता है। ऑनलाइन की सुविधा जितनी बेहतर है, कई बार तमाम कमियों के चलते लोग फ्रॉड के शिकार भी हो जाते हैं। ऑनलाइन स्कैम बढ़ते ही जा रहे हैं। आज मोबाइल पर एक गलत क्लिक से आप अपनी पूरी जमापूंजी खो बैठते हैं। इसका सीधा सा मतलब आजकल ऑनलाइन फ्रॉड (साइबर । फ्रॉड) से है, जहाँ फिशिंग लिंक, फेक ऐप्स या ओटीपी शेयर करने से बैंक खाता मिनटों में खाली हो जाता है। डिजिटल सुरक्षा में लापरवाही (जैसे असुरक्षित लिंक पर क्लिक) मेहनत की कमाई को तुरंत खत्म कर सकती है।

आज का नौजवान, जो डिजिटल दुनिया को सब से ज्यादा समझते हैं, वे भी अपराधियों की तकनीक देख कर भ्रम में पड़ जाते हैं और मिडिल क्लास लोग, जिन के लिए हर पाई की अहमियत बहुत ज्यादा होती है, उनके लिए डिजिटल ठगी सिर्फ माली नुकसान नहीं है, बल्कि यह इज्जत, आत्मविश्वास और मानसिक शांति की दुश्मन बन जाती है। आज भारत में रोजाना हजारों लोग डिजिटल ठगी के शिकार होते हैं। हालाँकि ऐसी ठगी से आमजनमानस को बचाने के लिए सरकार कई प्रयास करती है। लेकिन फिर भी जरा सी चूक लोगों के जमाखाते को नुकसान पहुंचाती है।

ऐसे में ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ के अंतर्गत प्रारंभ किए गए ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (सीएफसीएफआरएमएस) के सार्थक नतीजे देखने को मिले हैं। इसके माध्यम से साइबर धोखाधड़ी पर वार किया गया है। लगभग पांच वर्ष ‘1855’ दिन में साइबर धोखाधड़ी की 24.65 लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं। सीएफसीएफआरएमएस की त्वरित कार्रवाई के चलते ‘8690’ करोड़ रुपये से अधिक की राशि, ठगों के हाथ में जाने से बचा ली गई है।

गौरतलब है की डिजिटल अपराध सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या भी है। डिजिटल ठगी ने भारत के हर घर को प्रभावित किया है। यह सिर्फ मोबाइल और ऐप की समस्या नहीं, यह भरोसे, समझ, डर, सिस्टम और समाज की समस्या है। हम अगर जागरूक नहीं हुए, तो आने वाले समय में डिजिटल ठगी किसी महामारी की तरह फैल जाएगी। अपराधी तकनीक से तेज हैं और हमें भी अपनी समझ बुझ से तेज होना पड़ेगा।

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