देहरादून:(द दस्तक 24 न्यूज़) 05 जुलाई 2025 देश की सियासत में इन दिनों “खेत में नेता” एक चर्चित ट्रेंड बन चुका है। एक ओर राहुल गांधी खेत में पसीना बहाते नजर आए, तो वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धान की रोपाई करते दिखाई दिए। लेकिन दोनों तस्वीरों में जमीन-आसमान का फर्क है, जिसे जनता अब बखूबी समझने लगी है।
राहुल गांधी: खेत में सचमुच किसान के साथ
राहुल गांधी जब खेत में उतरे तो उनके चेहरे पर कोई बनावटीपन नहीं था। उन्होंने न केवल किसान से संवाद किया, बल्कि मिट्टी में अपने हाथ भी रंगे। पसीने से तर-बतर राहुल गांधी का उद्देश्य साफ था — भारत की कृषि व्यवस्था और किसान की जमीनी हकीकत को नजदीक से समझना। कोई मीडिया शो नहीं, कोई तैयार की गई स्टेजिंग नहीं — बस एक सादा नेता और एक सच्चा किसान।
पुष्कर सिंह धामी: कैमरे की तलाश में खेत में
दूसरी ओर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपने क्षेत्र खटीमा के नगरा तराई पहुंचे। उन्होंने भी खेत में धान रोपाई की, लेकिन उनके चारों ओर कैमरों की भरमार थी। फोटो खिंचवाना, वीडियो बनवाना और सोशल मीडिया पर वायरल कराना — पूरी गतिविधि एक प्रचार अभियान जैसी दिखी। लोग पूछने लगे कि क्या यह वाकई किसान से जुड़ाव था, या फिर सिर्फ एक छवि निर्माण का प्रयास?
जनता ने देख लिया है फर्क
आज का मतदाता पहले से कहीं अधिक जागरूक है। उसे दिखावे और सच्चाई में फर्क साफ नजर आता है। जहां राहुल गांधी ने बिना किसी बड़े प्रचार के सीधे किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझा, वहीं पुष्कर धामी की ‘धान रोपाई’ एक आयोजन जैसी लगी।
निष्कर्ष: अब अभिनय नहीं, असली संघर्ष चाहिए
राजनीति में अब केवल फोटो सेशन और वीडियो क्लिप्स से काम नहीं चलेगा। जनता अब ज़मीनी हकीकत को देखना चाहती है। उसे ऐसे नेता चाहिए जो सिर्फ कैमरे के लिए नहीं, बल्कि दिल से किसानों के साथ खड़े हों।
अब समय आ गया है जब अभिनय नहीं, असली संघर्ष और प्रतिबद्धता से ही नेता जनता का विश्वास जीत सकते हैं।
