संकट में कांग्रेस की सबसे बड़ी सरकार, सोनिया दरबार में पहुंचा मामला, क्या टूट जाएगा डीके शिवकुमार का सपना?

कांग्रेस पार्टी के लिए कर्नाटक में नेतृत्व का मसला नया सिरदर्द बन गया है. राज्य के सीएम सिद्दारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच खींचतान अब किसी से छिपी नहीं है. दोनों नेता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को साधने में लगे हैं. इस बीच बेंगलुरु पहुंचे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से दोनों ने अलग-अलग मुलाकात की है. मंगलवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, खरगे के साथ उनकी कार में मौजूद रहे तो दूसरी तरफ सीएम सिद्दारमैया उनके आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की. सिद्दारमैया चाहते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व कैबिनेट विस्तार को मंजूरी दे, वहीं शिवकुमार सीक्रेट डील का हवाला देकर पहले सीएम की कुर्सी चाहते हैं. सिद्दारमैया अपने साथ विधायकों के होने की दुहाई दे रहे हैं तो डीके सीक्रेट डील पर जोर दे रहे हैं.

इस बीच यह मसला दिल्ली दरबार भी पहुंच गया है. डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक मल्लिकार्जुन खरगे की रिपोर्ट के आधार पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी इस मसले पर अंतिम फैसला लेंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि संसद के मानसून सत्र से पहले ये दोनों नेता एक साथ दिल्ली दरबार में तलब किए जा सकते हैं. इन दोनों नेताओं से सोनिया और राहुल गांधी एक साथ बात करेंगे. मीटिंग की यह तारीख 28 या 29 नवंबर हो सकती है. इस बीच डीके शिवकुमार कैंप के कुछ विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. वे पार्टी नेतृत्व पर डीके शिवकुमार को सीएम बनाने का दबाव बना रहे हैं. वे खुलेआम कह रहे हैं कि डीके ही सीएम बनेंगे.
पब्लिक में बयानबाजी

अब इस मसले पर खुद डिप्टी सीएम और सीएम खुलकर बोलने लगे हैं. मंगलवार को दोनों नेताओं ने बयानबाजी की. सिद्दारमैया ने कहा कि हाईकमान को जल्द से जल्द इस मसले को सुलझाना होगा. वहीं शिवकुमार ने कहा कि जो सीक्रेट डील हुई थी उसमें पार्टी के टॉप पांच-छह नेता शामिल थे और अब उन्हीं पांच-छह नेताओं को फैसला लेना है. इस बीच खरगे ने सार्वजनिक तौर पर इस संकट को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने पिछले दिनों कहा था कि इसको लेकर पार्टी हाईकमान फैसला लेगा. पार्टी हाईकमान शब्द के इस्तेमाल पर उनकी खूब आलोचना हुई. मीडिया में यह सवाल उठा कि वह पार्टी के अध्यक्ष हैं तो फिर पार्टी में हाईकमान कौन हैं.