बंगाल फतह के लिए भाजपा की सीट-वार रणनीति बनाना शुरू

बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने पिछले छह वर्षों के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर अपनी सीट-वार रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा नेतृत्व यह सपना भी नहीं देख रहा है कि वह राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे पाएगी। अनौपचारिक बातचीत में बंगाल भाजपा के कई वरिष्ठ नेता यह स्वीकार करते हैं कि मुस्लिम बहुल कम से कम 50 विधानसभा सीटों पर अधिकांश बूथों पर पार्टी के एजेंट बिठाना भी संभव नहीं होगा। भाजपा लक्ष्य 148 को लेकर आगे बढ़ रही है।

हालांकि, राज्य भाजपा नेतृत्व का दावा है कि इन मुस्लिम बहुल सीटों को गणना से बाहर रखने के बावजूद, वे बंगाल विधानसभा में ‘जादुई आंकड़ा’ (सरकार बनाने के लिए आवश्यक 148 सीटें) के बहुत करीब पहुंच सकते हैं।भाजपा के इस आत्मविश्वास का आधार वे सीटें हैं, जिन पर पार्टी ने अतीत में कभी न कभी जीत हासिल की है।

भाजपा की बढ़त वाली अधिकांश सीटें मतुआ बहुल क्षेत्रों या उत्तर बंगाल में हैं, जैसे बनगांव और राणाघाट लोकसभा के अंतर्गत 14 में से 12 विधानसभा सीटें। इसके अलावा, कोलकाता और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में भी सीटें हैं, जहां भाजपा ने लगातार तीन बार नहीं तो कम से कम दो हालिया चुनावों में जीत या बढ़त हासिल की है, जैसे जोड़ासांको, श्यामपुकुर, विधाननगर और हाबरा। भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी मुस्लिम बहुल 50 सीटों को नकारात्मक सूची में रखकर शेष 244 सीटों पर ध्यान केंद्रित करेगी। राज्य भाजपा के कई पदाधिकारियों का मानना है कि यदि इन 244 सीटों में से 100 सीटें भी हार जाते हैं, तो भी वे ‘जादुई आंकड़े’ के बहुत करीब रहेंगे।