सपा अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव सुधार तभी संभव है, जब चुनाव निष्पक्ष होंगे। चुनाव सुधार के लिए चुनाव आयोग में नियुक्ति का तरीका बदला जाए। चुनाव आयोग की नियुक्ति निष्पक्ष और पारदर्शी हो। आयोग की नियुक्ति की जो व्यवस्था पहले थी, भाजपा सरकार ने उसे बदल दिया। विपक्ष को लगना चाहिए कि नियुक्ति में उसकी भी भूमिका है। अखिलेश यादव ने मंगलवार को संसद में चुनाव सुधार पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए। ईवीएम से चुनाव पर बहुत सवाल उठ रहे हैं। भारत ही नहीं पूरी दुनिया के अंदर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर सवाल उठ रहे हैं। जो टेक्नालॉजी की बात कर रहे है वे भारत की जर्मनी, अमेरिका और जापान से तुलना कर लें, पता चल जाएगा कि हम कहां खड़े हैं।
कई विकसित देश जो तकनीक में भारत से कई गुना आगे हैं, अगर वे ईवीएम को नहीं स्वीकार कर रहें हैं तो यहां ईवीएम का इस्तेमाल क्यों हो रहा है। जर्मनी जैसे देश में ईवीएम से वोटिंग असंवैधानिक माना जाता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव के दौरान खातों में पैसा देकर प्रभावित किया जा रहा है। एक तरफ भाजपा पैसा देती है, वहीं दूसरी तरफ अगर विपक्षी दल की सरकार कोई नीति लागू करती है तो भाजपा उस पर रोक लगवाती है। चुनाव के समय पर सभी राजनीतिक दलों को मीडिया में बराबर स्थान मिलना चाहिए। भाजपा हजारों करोड़ रुपया नकारात्मक कैंपेन के लिए खर्च करती है।
इसी प्रकार अखिलेश ने कहा इसी तरह से इलेक्ट्रोरल बांड का सबसे ज्यादा पैसा भाजपा को मिलता है। उन्होंने कांग्रेस पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि वो भी उन्हें नहीं बताती कि इलेक्टोरल बॉन्ड से कितना धन मिला।
वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर को लेकर बीएलओ पर भारी दबाव है। उत्तर प्रदेश में 9 बीएलओ की जान चली गई है। हमारी मांग है कि चुनाव आयोग एक-एक करोड़ रुपये से मदद करे और सरकारी नौकरी दे।
