मूलगंघ कुटी बिहार, सारनाथ में भदन्त ज्ञानेश्वर महास्थवीर जी के कृतित्व एंव व्यतित्व को स्मरण करते हुए महाबोधि सोसाइटी ऑफ इण्डिया के महासचिव भदन्त सीवली महाथेरो के सानिध्य मे शान्तिपाठ किया गया. यहां आये भिक्षुओं ने मूलगंघ कुटी बिहार के विहाराधिपति भदन्त सुमित्तानन्द थेरो जी को भी समस्त प्रबंधन के लिए अनन्त आभार जताया .
गौरतलब है की बौद्ध भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत ज्ञानेश्वर महास्थवीर का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था . 31 अक्टूबर की सुबह 4.50 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली थी . उनके पार्थिव शरीर को दर्शनार्थ कुशीनगर स्थित वर्मा बुद्ध विहार परिसर में 10 नवम्बर तक डीप फ्रीजर में रखा गया है. 11 नवम्बर को नगर भ्रमण के बाद मंदिर परिसर के पीछे निर्धारित स्थान पर बौद्ध रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. यहीं उनकी समाधि और स्तूप का निर्माण होगा.
यहां बौद्ध भिक्षु आलोक ने बताया की 10 नवम्बर को ही गुरुजी का जन्मदिन है. इस वर्ष भव्य आयोजन की योजना थी, लेकिन उसके पहले ही देहावसान की खबर से सभी अनुयायी स्तब्ध हैं. भदंत ज्ञानेश्वर का जन्म 1936 में बर्मा में हुआ था. 1963 में वे भारत पहुंचे और कुशीनगर में वर्मा बुद्ध मंदिर की स्थापना की. बौद्ध साहित्य, आध्यात्मिक हस्तक्षेप और धार्मिक नेतृत्व में उनका बड़ा योगदान रहा. आगे भिक्षु आलोक ने बताया कि गुरुजी कहा करते थे “हमारा जीवन कांच की बोतल की तरह है, जैसे उसमें रंग डाल दो, वैसे ही मन भी समाज की कुरीतियों से रंग जाता है. मन को बोतल की तरह ही साफ-सुथरा रखो.
