उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बड़ा सुधार: बनेगा उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 23 सितम्बर 2025 उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य की आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पारदर्शी, एकरूप और कार्मिक हितैषी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसके अंतर्गत “उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम” (UPCOS) का गठन कम्पनीज एक्ट, 2013 की धारा-8 के अंतर्गत एक पब्लिक लिमिटेड, नॉन-प्रॉफिटेबल कम्पनी के रूप में किया जा रहा है।

क्यों जरूरी पड़ा नया निगम?

वर्तमान में शासन विभागों और संस्थाओं में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्मिक सेवाएं ली जाती रही हैं। लेकिन कई गंभीर समस्याएं सामने आईं—कार्मिकों को उनका पूरा वेतन समय पर नहीं मिल पाता। EPF और ESIC जैसी अनिवार्य सुविधाओं का भुगतान नहीं किया जाता। सेवाओं के नवीनीकरण और लाभों में अनियमितता बरती जाती है अलग-अलग विभाग अलग कमीशन दरों पर एजेंसियों को भुगतान करते हैं। आरक्षण व्यवस्था का अनुपालन नहीं हो पाता। इन खामियों को दूर करने और एकीकृत प्रणाली बनाने के लिए UPCOS का गठन किया जा रहा है।

निगम की कार्यप्रणाली

निगम एक Regulatory Body (नियामक निकाय) के रूप में कार्य करेगा। यह आउटसोर्स एजेंसियों पर कमांड और कंट्रोल रखते हुए नियमों और मानकों का पालन सुनिश्चित करेगा। निगम विभागों और संस्थाओं की मांग पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्मिक उपलब्ध कराएगा। Tripartite Agreement (विभाग, एजेंसी और निगम) के जरिए पारदर्शी प्रक्रिया लागू होगी।

विजन और उद्देश्य

विजन – आउटसोर्स कार्मिकों को पूरा पारिश्रमिक और अन्य सुविधाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना।

उद्देश्य – शासन के सभी विभागों को स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड और अनस्किल्ड मैनपावर की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

कार्मिकों को लाभ

1. हर माह की 1 से 5 तारीख तक वेतन का भुगतान। 2. EPF और ESIC की अनिवार्य जमा राशि की गारंटी। 3. बैंक और अन्य अनुमन्य सुविधाओं तक सीधी पहुंच। 4. प्रशिक्षण और कौशल विकास की व्यवस्था। 5. आरक्षण का सख्ती से पालन – SC/ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाएं, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों को वरीयता।

आउटसोर्सिंग एजेंसियों का दायित्व

5 तारीख तक वेतन भुगतान अनिवार्य। EPF और ESIC खातों का खुलवाना और योगदान जमा करना। हर माह 10 तारीख से पहले भुगतान प्रमाण-पत्र निगम को सौंपना। लापरवाही या अनुबंध उल्लंघन पर एजेंसी पर पेनाल्टी/ब्लैकलिस्टिंग।

भर्ती और तैनाती की प्रक्रिया

विभागों की मांग के अनुसार सेवायोजन विभाग पोर्टल से उम्मीदवार उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक पद के लिए आरक्षण नियमों और शैक्षणिक योग्यता का पालन होगा। ग्रुप C और D पदों पर कोई साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को वरीयता। चयनित अभ्यर्थी की सूची समिति से सत्यापित होकर निगम को भेजी जाएगी और निगम द्वारा एजेंसी को अंतिम रूप से अनुमोदित की जाएगी।

क्या बदलेगा इस व्यवस्था से?

आउटसोर्स कर्मियों को अब शोषण से मुक्ति मिलेगी और उन्हें समय से पूरा वेतन व सभी कानूनी सुविधाएं मिलेंगी। विभागों और संस्थाओं के लिए एक पारदर्शी और मानकीकृत प्रणाली उपलब्ध होगी। एजेंसियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा आरक्षण और सामाजिक न्याय की गारंटी होगी।

यह कदम उत्तर प्रदेश की लाखों आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए राहत और पारदर्शिता लाने वाला साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि UPCOS मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।