लखनऊ:यूपी में जाति आधारित प्रदर्शन और अंकन पर सख्ती, कोर्ट आदेश के बाद सरकार ने जारी किए निर्देश।

लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 23 सितम्बर 2025 उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिवादी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब पुलिस रिकॉर्ड्स, वाहनों, थानों के नोटिस बोर्ड, साइनबोर्ड और सोशल मीडिया पर जाति का उल्लेख या प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।

कोर्ट का आदेश बना आधार

यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद आया है।

क्रिमिनल मिस. अप्लीकेशन 482 संख्या-31545/2024 प्रवीण छेत्री बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में दिनांक 16 सितम्बर 2025 को हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि: पुलिस अभिलेखों (जैसे FIR, गिरफ्तारी मेमो, केस डायरी) में अभियुक्तों की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। वाहनों, सार्वजनिक स्थानों, सरकारी दफ्तरों, साइनबोर्ड और सोशल मीडिया पर जातीय प्रदर्शन या जाति आधारित महिमामंडन नहीं होना चाहिए। ऐसे तत्व जो जातीय रैलियों या प्रदर्शनों के जरिए समाज में तनाव फैलाने की कोशिश करें, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शासन ने जारी किए आदेश

मुख्य सचिव दीपक कुमार ने शासनादेश जारी कर समस्त विभागों और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है। आदेश की प्रति निम्नलिखित अधिकारियों को भेजी गई है:

समस्त अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था व अपराध, समस्त पुलिस आयुक्त, समस्त जिला मजिस्ट्रेट, समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक

लागू होंगे ये प्रमुख प्रावधान

1. वाहनों पर जाति लिखने पर चालान – अब किसी भी वाहन पर जाति का उल्लेख करने पर चालान किया जाएगा।

2. FIR और गिरफ्तारी मेमो में जाति का उल्लेख नहीं – अभियुक्त या फरियादी की जाति का रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगा।

3. थानों और दफ्तरों से जातीय नारे हटेंगे – नोटिस बोर्ड, थाने या सार्वजनिक स्थानों पर जातीय संकेतक और नारे हटाने होंगे।

4. जातीय रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध – किसी भी प्रकार की जातीय आधार पर आयोजित रैली या प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी।

5. सोशल मीडिया पर निगरानी – जातीय महिमामंडन, नारेबाजी और प्रचार करने वालों पर नजर रखी जाएगी और कार्रवाई होगी।

उद्देश्य: सामाजिक समानता और समरसता

सरकार का कहना है कि यह कदम सर्वसमावेशी और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित व्यवस्था को मजबूत करेगा। जातीय विभाजन और भेदभाव को खत्म करना इस नीति का प्रमुख उद्देश्य है।

आगे क्या?

पुलिस और प्रशासन को तुरंत प्रभाव से इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। आदेश की अवहेलना करने वालों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।