नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 21 सितम्बर 2025 सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी भी थाने में पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता से तू-तड़ाक या अभद्र भाषा में बात करता है, तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन होगा। यह नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसका हनन करने वाले पुलिसकर्मी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह महत्वपूर्ण फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पावुला येसु दासन बनाम राज्य मानवाधिकार आयोग तमिलनाडु (SLP(C) No. 20028/2022, डायरी नंबर 33406/2022) मामले में दिया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में तमिलनाडु राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेश को बरकरार रखा और दोषी पुलिस इंस्पेक्टर पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
थाने में शिकायत दर्ज कराने वाला हर व्यक्ति गरिमा और सम्मान का हकदार है। यह केवल सामाजिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। शिकायतकर्ता से अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा का प्रयोग मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस तरह का व्यवहार पुलिस की साख को चोट पहुँचाने वाला है और ऐसे दोषी पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है।
मामला कैसे शुरू हुआ?
यह विवाद तब उठा जब एक शिकायतकर्ता ने तमिलनाडु के एक पुलिस इंस्पेक्टर पर अभद्र व्यवहार और गलत रवैया अपनाने का आरोप लगाया। मामला राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा। आयोग ने जांच में पाया कि इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता से असम्मानजनक तरीके से पेश आया था।
इसके बाद आयोग ने इंस्पेक्टर पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इंस्पेक्टर ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने आयोग के निर्णय को सही ठहराते हुए जुर्माना बरकरार रखा।
फैसले का महत्व
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश की पुलिस व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा को और मजबूत करेगा। अब कोई भी शिकायतकर्ता थाने में जाकर अपमानजनक व्यवहार का शिकार नहीं होगा। यह आदेश सभी राज्यों और पुलिस विभागों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा।इससे पुलिसकर्मियों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि शिकायतकर्ता से अनुचित व्यवहार पर कठोर सजा मिलेगी।
नागरिकों के लिए राहत
इस फैसले से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। अब यदि किसी थाने में उनसे अभद्र व्यवहार किया जाता है, तो वे इसे अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के रूप में कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। साथ ही, पुलिसकर्मी पर आर्थिक दंड और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव होगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि थानों में अब तू-तड़ाक नहीं चलेगा, हर आदमी को मिलेगा सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार।
