शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार द्वारा हर वर्ष विद्यालयों में मुफ्त किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। लेकिन हैरानी की बात है कि इन किताबों को ही विद्यालय से कबाड़ में बेच दिया गया। यह चौंकाने वाला मामला रायबरेली जनपद के सरेनी विकासखण्ड के एक प्राथमिक विद्यालय से प्रकाश में आया है।
रविवार को विद्यालय से कबाड़ी को बुलाकर बच्चों के लिए नए सत्र की मुफ्त किताबें बेची गईं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कबाड़ी किताबों को उठाकर ले जा रहा है। ग्रामीणों की माने तो उक्त कबाड़ी धनपालपुर मजरे दलगंजन के पुरवा का रहने वाला है।
लोगों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका शैलजा तिवारी की शह पर ही यह किताबें कबाड़ में बेची गई हैं। इस घटना ने न केवल ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया है बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब गरीब और जरूरतमंद बच्चों को किताबें नहीं मिलेंगी तो वे शिक्षा से कैसे जुड़ पाएंगे।
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी किताबें बच्चों के अधिकार की चीज हैं, जिन्हें इस तरह बेचना बेहद शर्मनाक है। यदि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा का अधिकार केवल कागजों में सिमटकर रह जाएगा।
इस पूरे मामले में जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में प्रधानाध्यापिका की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में गरीब बच्चों के हक से खिलवाड़ न हो सके। यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिरकार बच्चों के भविष्य से इस तरह का खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा। सरकार की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ यदि जमीनी स्तर पर नहीं मिलेगा तो फिर शिक्षा का उद्देश्य अधूरा ही रह जाएगा।
