नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 19 सितंबर 2025 जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ‘विकास’ के नाम पर की जा रही पर्यावरण से छेड़छाड़ इस त्रासदी की सबसे बड़ी वजह है। विशेषज्ञों और स्थानीय जनता का मानना है कि पिछले एक दशक में पहाड़ों को काटकर, नदियों के किनारों को कमजोर कर, और जंगलों की अंधाधुंध कटाई करके सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं को और भी भयावह बना दिया है।
पिछले 11 वर्षों में बड़े कॉरपोरेट घरानों को हजारों एकड़ भूमि औने-पौने दामों में सौंपे जाने और अनियंत्रित निर्माण कार्यों ने पारिस्थितिकी संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ा है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही अतिक्रमण और मैदानी इलाकों में वनों की कटाई ने बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है।
आंदोलन पर सख्ती, सवालों के घेरे में सरकार
जनता का कहना है कि पर्यावरण और जनहित की रक्षा के लिए जब भी स्थानीय लोग शांतिपूर्ण आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करते हैं तो सरकार उन्हें बर्बरता से दबा देती है। कठोर नियम बनाकर जनता को डराने-धमकाने की कोशिश लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानी जा रही है।
विरोध करने वालों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन जनता का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस अधिकार को कुंद करने का काम किया है। इससे आम लोगों का आक्रोश और भी बढ़ रहा है।
गृहमंत्री पर भी उठे सवाल
विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि गृहमंत्री अमित शाह जहां आंदोलनों को शक की नजर से देखते हैं, वहीं उन्हें देश में समय-समय पर हुए दंगे, फसाद और हिंसक घटनाओं के पीछे असली षड्यंत्रकारियों की जांच कराने पर भी ध्यान देना चाहिए।
कॉरपोरेट को लाभ, जनता पर बोझ
जनता के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि बड़े उद्योगपतियों, खासकर अडानी समूह, को फायदा पहुंचाने की नीतियों के कारण देश और आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। आरोप है कि विकास की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों की लूट की जा रही है, जिससे आम जनता की जिंदगी और कठिन हो रही है।
लोकतंत्र की असली ताकत
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा हथियार उसका आंदोलन और विरोध प्रदर्शन है। यदि इस हथियार की धार को सरकार कुंद करती है, तो यह सरकार निश्चित ही जनविरोधी और राष्ट्रविरोधी कहलाने की हकदार है।
