लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 28 अगस्त 2025 उत्तर प्रदेश के संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई भीषण हिंसा पर गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने अपनी करीब 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में न केवल हिंसा के कारणों और षड्यंत्रों का जिक्र है, बल्कि जिले की बदलती डेमोग्राफी, तुष्टिकरण की राजनीति और विदेशी हथियारों की मौजूदगी पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के बड़े दावे
1. डेमोग्राफिक बदलाव
स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में 55% मुस्लिम और 45% हिंदू आबादी थी।
वर्तमान में मुस्लिम जनसंख्या बढ़कर लगभग 85% हो गई है, जबकि हिंदू परिवार घटकर केवल 15% रह गए हैं।
आयोग ने साफ कहा है कि बीते दशकों में हुए दंगे और तुष्टिकरण की राजनीति ने जिले की सामाजिक संरचना को पूरी तरह बदल दिया।
2. आतंकी संगठनों का ठिकाना
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि संभल अब कई आतंकी संगठनों का अड्डा बन चुका है।
यहां अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क भी सक्रिय बताया गया है।
3. विदेशी हथियारों का इस्तेमाल
24 नवंबर 2024 की हिंसा में विदेशी हथियारों के इस्तेमाल के ठोस सबूत मिले हैं।
आयोग ने विशेष रूप से बताया कि हिंसा के दौरान Made in USA हथियार बरामद हुए, जिससे यह स्पष्ट है कि इस हिंसा के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं।
दंगों का इतिहास भी शामिल
450 पन्नों की इस रिपोर्ट में सिर्फ 24 नवंबर की हिंसा ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के बाद से अब तक संभल में हुए सभी 15 दंगों का पूरा ब्यौरा शामिल है।
रिपोर्ट में प्रत्येक दंगे की तारीख, उसमें हुई जनहानि, संपत्ति का नुकसान, प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद की स्थिति का विस्तार से उल्लेख है।
आयोग ने कहा है कि बार-बार होने वाले दंगे केवल प्रशासनिक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि संगठित षड्यंत्र का हिस्सा हैं।
प्रशासन और खुफिया तंत्र पर सवाल
न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि संभल हिंसा को लेकर प्रशासन और खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम रहा।
समय रहते सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सक्रिय होतीं तो हिंसा को रोका जा सकता था।
आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष निगरानी, पुलिस सशक्तिकरण और खुफिया प्रणाली मजबूत करने की सिफारिश की है।
आगे की कार्यवाही
इस रिपोर्ट को सबसे पहले राज्य कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा।
माना जा रहा है कि रिपोर्ट में दिए गए नीतिगत और सुरक्षा संबंधी सुझावों पर सरकार जल्द ही ठोस कदम उठा सकती है।
समिति ने कैसे किया काम
तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने से पहले मौके पर जाकर जांच की।
आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों से विस्तृत बातचीत की।
घटनास्थलों का निरीक्षण किया और सबूतों को एकत्रित कर उनका गहन विश्लेषण किया।
इसके बाद ही 450 पन्नों की यह रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे अब मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और विधानसभा में इस रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाया जाएगा।
