झाँसी:बुंदेलखंड राष्ट्र समिति झाँसी क्षेत्र की कार्यशाला सम्पन्न “राखी भेजो–राज्य माँगो” अभियान को लेकर बनी व्यापक कार्ययोजना।

झाँसी:(द दस्तक 24 न्यूज़) 07 जुलाई 2025 बुंदेलखंड को पृथक राज्य का दर्जा दिलाने की माँग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और अधिक व्यापक और संगठित रूप लेता जा रहा है। इसी क्रम में बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा झाँसी में एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला शुभ आशीर्वाद विवाह घर, ग्वालियर रोड, झाँसी में सम्पन्न हुई, जिसमें समिति के राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी “राखी भेजो – राज्य माँगो” अभियान की रणनीति तय करना और आंदोलन को गाँव-गाँव तक पहुँचाने की योजना को अमल में लाना था। कार्यशाला में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री यज्ञेश गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया और आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने की प्रेरणा दी।

एक लाख राखियाँ प्रधानमंत्री को भेजेगा बुंदेलखंड

“राखी भेजो – राज्य माँगो” अभियान के अंतर्गत जुलाई एवं अगस्त माह में पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के छात्र-छात्राएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी के साथ एक भावनात्मक पत्र भेजेंगे, जिसमें वे पृथक बुंदेलखंड राज्य की माँग करेंगे। इस अभियान के माध्यम से एक लाख से अधिक राखियाँ और पत्र भेजे जाने का लक्ष्य तय किया गया है।

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे हर गाँव, हर जिले, हर समुदाय तक ले जाया जाएगा। जनजागरण यात्राओं, जिला स्तरीय कार्यशालाओं और संगठन के विस्तार की विस्तृत कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य वक्ता यज्ञेश गुप्ता का संदेश

श्री यज्ञेश गुप्ता ने कहा, “अब समय आ गया है कि आंदोलन को सिर्फ़ मंचों तक नहीं, बल्कि घर-घर तक पहुँचाया जाए। राखी एक पवित्र भाव है और इस अभियान के ज़रिए हम प्रधानमंत्री को एक बहन-भाई के रिश्ते में भावनात्मक अपील करेंगे। दिल्ली तक हमारी आवाज़ जरूर पहुँचेगी।”

कार्यशाला में रहे ये प्रमुख चेहरे

कार्यक्रम में समिति के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:

ज्ञानेश्वर कुशवाहा, रोहित परिहार, अनिल झा, रहीस मोहम्मद, इस्माइल खान, कृष्ण बिहारी तिवारी, गोविंद दास, देवेंद्र राय, हेमंत परिहार, नीरज स्वामी, लखन कुशवाहा, पुनीत अग्रवाल, देवीदास कुशवाहा, संजय बाल्मीकि, आशीष दुबे, दिलीप रैकवार, अजय कुमार, संजय अग्रवाल आदि शामिल रहे।

कार्यशाला के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि आंदोलन को राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की आत्मा और जनता की आकांक्षाओं को स्वर देने के लिए चलाया जा रहा है।