लखनऊ:(द दस्तक 24 न्यूज़) 06 जुलाई 2025 उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025–26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून) की रिपोर्ट जारी की है, जिसमें राज्य ने राजस्व, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वाहन पंजीकरण और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। यह तिमाही विभाग के लिए केवल प्रदर्शन का नहीं, बल्कि नीतिगत परिवर्तन और व्यवहारिक बदलाव का भी प्रतीक बनकर सामने आई है।
राजस्व में 10.39% की उल्लेखनीय वृद्धि
विभाग ने अप्रैल–जून 2025 के दौरान ₹2913.78 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में ₹274.22 करोड़ अधिक है। यह 10.39% की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। जून माह में अकेले ₹830.15 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ, जो साल-दर-साल आधार पर 4.10% अधिक है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई जब ई-वाहनों पर टैक्स में भारी रियायतें दी गईं और पूरा महीना स्थानांतरण सत्र के रूप में रहा।
ई-मोबिलिटी में यूपी की निर्णायक छलांग
इस तिमाही में प्रदेश में 70,770 इलेक्ट्रिक वाहनों को ₹255.50 करोड़ की कर रियायत प्रदान की गई। इनमें 5,658 इलेक्ट्रिक कारें और 15,434 दोपहिया वाहन शामिल हैं, जो यह संकेत देते हैं कि अब ईवी केवल लो-एंड विकल्प नहीं रहे, बल्कि मिड और अर्ध-प्रिमियम वर्ग के बीच भी लोकप्रिय हो चुके हैं। जून में ही 23,513 ई-वाहनों को ₹94.70 करोड़ की छूट दी गई। अब तक प्रदेश में 12.29 लाख से अधिक ई-वाहन पंजीकृत हो चुके हैं, जो उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे बड़ा ईवी बेस वाला राज्य बना रहे हैं।
वाहन पंजीकरण में उत्साहजनक वृद्धि
प्रथम तिमाही में कुल 11,77,474 नए परिवहन वाहन पंजीकृत हुए, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 16.04% की वृद्धि देखी गई। ई-रिक्शा में 10.82% और ई-कार्ट में 80.26% की बढ़त दर्शाती है कि ये वाहन अब केवल परिवहन नहीं, बल्कि आजीविका और सामाजिक गतिशीलता के भी प्रतीक बन गए हैं।
नॉन-ट्रांसपोर्ट श्रेणी में भी 9,67,476 पंजीकरण दर्ज हुए, जो 12.41% की वार्षिक वृद्धि है। टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वर्ग में क्रमशः 13.73% और 6.09% की वृद्धि से प्रदेश की खरीद क्षमता और गतिशीलता में बढ़ोतरी स्पष्ट होती है।
डिजिटल भुगतान में अभूतपूर्व भरोसा
तिमाही में 90% से अधिक कर व शुल्क की वसूली ऑनलाइन माध्यम से की गई, जो नागरिकों के डिजिटल व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। ड्राइविंग लाइसेंस सेवाओं से ₹84.50 करोड़ और ई-चालान/समन शुल्क से ₹30.45 करोड़ की वसूली हुई, जो प्रौद्योगिकी-सक्षम पारदर्शी प्रशासन को प्रमाणित करता है।
नीति और छूट आधारित मॉडल की सफलता
परिवहन विभाग ने एक ओर जहाँ ई-वाहनों के लिए ₹255.50 करोड़ की रियायत दी, वहीं कुल राजस्व में 10.39% की वृद्धि भी सुनिश्चित की — यह साबित करता है कि विभाग ने ‘प्रोत्साहन के साथ स्थिर राजस्व’ का संतुलन सफलतापूर्वक साधा है।
परिवहन आयुक्त का वक्तव्य
परिवहन आयुक्त श्री ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा,
यह तिमाही प्रदर्शन केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक शासन मॉडल की कहानी है। यह नीति, प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और जनभागीदारी के चार स्तंभों पर आधारित परिवहन व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश अब परिवहन क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर चुका है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि परिवहन अब केवल एक विभागीय सेवा न रहकर, जन-संवेदनाओं से जुड़ा एक सामाजिक संस्कार बन चुका है। तकनीकी नवाचार, नागरिक सहयोग और नीतिगत स्थिरता की त्रयी से प्रदेश ने ‘परिवहन प्रशासन’ को ‘सार्वजनिक प्रगति’ का औजार बना दिया है।
