Monday, 14 September 2026 | 8:46 PM
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'SIR में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे', बंगाल की CM ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को साफ संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह राज्यों में चल रहे लेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में एसआईआर के तहत दस्तावेजों की जांच के लिए समय सीमा एक सप्ताह तक बढ़ा दी है।यह जानकारी लाइव लॉ ने दी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट पश
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'SIR में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेंगे', बंगाल की CM ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को साफ संदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह राज्यों में चल रहे लेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में एसआईआर के तहत दस्तावेजों की जांच के लिए समय सीमा एक सप्ताह तक बढ़ा दी है।यह जानकारी लाइव लॉ ने दी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल की एसआईआर से जुड़े कई मामलों पर सुनवाई कर रहा है। इनमें ममता बनर्जी की एक याचिका भी शामिल थी। इसमें उन्होंने अन्य मुद्दों के साथ-साथ 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' सूची में मतदाताओं को जिस तरह से कैटेगरी में बांटा गया है, उसे चुनौती दी गई थी।

चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का चुनाव आयोग के साथ लंबा टकराव पिछले सप्ताह और बढ़ गया, जब वह खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए दखल देने की अपील की। एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर राजनीतिक पक्षपात से काम करने का आरोप लगाया है।

उनका आरोप है कि जिस तरह से वोटर रिविजन एक्सरसाइज की जा रही है, उससे समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के लाखों वोटरों के नाम हटा दिए जाएंगे। उन्होंने चुनाव निकाय को एसआईआर एक्सरसाइज के दौरान किसी भी वोटर का नाम हटाने से रोकने के लिए अंतरिम निर्देश मांगे हैं, खासकर उन लोगों के नाम जो 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' कैटेगरी में रखे गए हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीएम ममता की याचिका पर ईसीआई को नोटिस जारी किया था।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि स्थानीय बोलियों के कारण स्पेलिंग में अंतर पूरे भारत में होता है और यह असली वोटरों को बाहर करने का आधार नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करते हुए सीएम बनर्जी ने दावा किया कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और घर बदलने वाले लोगों पर इसका असमान रूप से असर पड़ रहा है।