Monday, 14 September 2026 | 10:08 PM
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क्या होता है विद्युत-रसायन का महत्व, आईये जानते है

विद्युतरसायन (eletro-chemistry), भौतिक रसायन की वह शाखा है जिसमें उन रासायनिक अभिक्रियों का अध्ययन किया जाता है जो किसी विलयन (सलूशन्) के अन्दर एक एलेक्ट्रान चालक और एक ऑयनिक चालक (विद्युत अपघट्य) के मिलन-तल (इन्टरफेस) पर होती है। इसमें इलेक्ट्रान चालक कोई धातु या अर्धचालक हो सकता है। यदि रासायनिक अ
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क्या होता है विद्युत-रसायन का महत्व, आईये जानते है
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विद्युतरसायन (eletro-chemistry), भौतिक रसायन की वह शाखा है जिसमें उन रासायनिक अभिक्रियों का अध्ययन किया जाता है जो किसी विलयन (सलूशन्) के अन्दर एक एलेक्ट्रान चालक और एक ऑयनिक चालक (विद्युत अपघट्य) के मिलन-तल (इन्टरफेस) पर होती है। इसमें इलेक्ट्रान चालक कोई धातु या अर्धचालक हो सकता है।
यदि रासायनिक अभिक्रिया किसी बाहर से आरोपित विभवान्तर (वोल्टेज्) के कारण घटित होती है (जैसे विद्युत अपघटन में) ; या रासायनिकभिक्रिया के परिणामस्वरूप विभवान्तर पैदा होता है (जैसे बैटरी में) तो ऐसी रासायनिक अभिक्रियों को विद्युत्त्-रासायनिक अभिक्रिया (electrochemical reaction) कहते हैं। सामान्य रूप से देखें तो पाते हैं कि विद्युत रासायनिक अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण एवं अपचयन क्रियाएं निहित होती हैं जो समय या स्थान (स्पेस और टाइम) में अलग होती हैं और किसी बाहरी परिपथ से जुड़ी होती हैं।
महत्व
अनेक रसायन (chemicals) विद्युत् से दूसरे रसायनकों में परिवर्तित किए जा सकते हैं। यह विषय आज बहुत विशाल और महत्व का हो गया है। इसकी इस बात से पुष्टि हो जाती है कि बाजारों में बिकनेवाली अनेक वस्तुएँ, जैसे धातुएँ, मिश्रधातुएँ, रसायन, साज-सज्जा के सामान आदि विद्युत् विधियों द्वारा ही आज बनती हैं। विद्युत् विधियाँ पुरानी अविद्युत् विधियों का स्थान बड़ी तीव्रता से ले रही हैं। विद्युत् ऊर्जा की अधिक उपलब्धि के साथ साथ विद्युतरासायनिक उद्योगों का आज अधिकाधिक विकास हो रहा है।
रासायनिक क्रियाओं में साधारणतया ऊष्मा परिवर्तन, ऊष्मा का निष्कासन, या ऊष्मा का अवशोषण होता है, पर कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में रासायनिक क्रियाओं से विद्युत् ऊर्जा का भी उत्पादन हो सकता है। रासायनिक ऊर्जा के विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तन का अच्छा उदाहरण प्राथमिक सेल और बैटरियाँ हैं। शुष्क बैटरियाँ भी इसी सिद्धांत पर बनी हैं। विद्युत् रासायनिक परिवर्तनों में विद्युत् प्रवाह से सोडियम और क्लोरीन में विघटित हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप हमें दाहक सोडा, हाइड्रोजन और क्लोरीन प्राप्त होते हैं। वे तीनों ही उत्पाद औद्योगिक दृष्टि से बड़े महत्व के हैं।