Monday, 14 September 2026 | 9:59 PM
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बहुत सुन्दर कथा

एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी ! इस पर पुजारी ने पूछा - क्यों ? तब महिला बोली - मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्याद
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बहुत सुन्दर कथा
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एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी ! इस पर पुजारी ने पूछा - क्यों ? तब महिला बोली - मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं ! इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा - सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं ! महिला बोली -आप बताइए क्या करना है ? पुजारी ने कहा - एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये ! महिला बोली - मैं ऐसा कर सकती हूँ ! फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे - 1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा? 2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा? 3.क्या किसी को पाखंड करते देखा? महिला बोली - नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा ! फिर पुजारी बोले - जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया| अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा| सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें| " जाकी रही भावना जैसी .. प्रभु मूरत देखी तिन तैसी|" जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ? ना भगवान, ना गृह-नक्षत्र, ना भाग्य, ना रिश्तेदार, ना पडोसी, ना सरकार, जिम्मेदार आप स्वयं है| 1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम| 2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम| 3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम| 4) आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम| 5) आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम| 6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम| उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं | इसमें ईश्वर दोषी नहीं है| अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है। रिपोर्ट- शिवम जोशी जनसंचार एव पत्रकारिता विभाग कानपुर विस्वविद्यालय