Monday, 14 September 2026 | 9:18 PM
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शशि थरूर की हिंदी में जवाब देने पर टिप्पणी पर सिंधिया ने जताई आपत्ति

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान हिंदी में जवाब देने के मुद्दे पर गुरुवार को नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखी गई। तमिलनाडु के एक सदस्य के अंग्रेजी में पूछे गए पूरक प्रश्न का केंद्रीय म
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शशि थरूर की हिंदी में जवाब देने पर टिप्पणी पर सिंधिया ने जताई आपत्ति
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लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान हिंदी में जवाब देने के मुद्दे पर गुरुवार को नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखी गई। तमिलनाडु के एक सदस्य के अंग्रेजी में पूछे गए पूरक प्रश्न का केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा हिंदी में उत्तर दिए जाने पर तिरुअनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आपत्ति व्यक्त किया।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह अपमान है, मंत्री हिंदी में जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री अंग्रेजी जानते हैं और उन्हें अंग्रेजी में जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जरा जवाब हिंदी में मत दीजिए… ये अपमान है लोगों का।'

इस पर सिंधिया ने कहा, 'यह अजीब बात है। हमारे यहां अनुवादक हैं। मैं अंग्रेजी में क्यों जवाब दूं। मैं हिंदी में बोलूं तो सदस्य को एतराज हो रहा है।' थरूर की टिप्पणी के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि यह अपमान नहीं है

एक अरसे के बाद संसद के दोनों सदनों में कामकाज सामान्य होता नजर आया। भले ही यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बजट सत्र की शुरुआत में की गई अपील का असर हो या विपक्ष की बदली रणनीति, लेकिन बुधवार को बिना बाधा के कामकाज हुआ। राज्यसभा में तो चार सत्रों की 41 बैठकों के बाद सुचारू रूप से चर्चा हुई। राज्यसभा सचिवालय ने बताया कि सदन की व्यवधान रहित पिछली बैठक बजट सत्र के दौरान 19 मार्च, 2021 को हुई थी। बैठक शुरू होते ही सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदस्यों से बजट सत्र के दौरान सदन का निर्बाध कामकाज सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उनका आचरण ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों का संसदीय लोकतंत्र में भरोसा बना रहे।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों का रंग पूरे समय देखने को मिला। शून्यकाल से लेकर प्रश्नकाल तक और फिर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों को एक जैसे ही बोलने का मौका मिला, वे इन राज्यों से जुड़े मुद्दों को उठाने से नहीं चूके।