सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर ही भव्य मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इतिहास की एक भूल को सुधारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सर्वसम्मति से फैसला दिया और विवादित ढांचा तोड़े जाने के कारण मस्जिद निर्माण के लिए अलग से पांच एकड़ भूमि के आवंटन का निर
By
Adarsh Kumar
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Published
11 November 2019, 12:22 PM
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर ही भव्य मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इतिहास की एक भूल को सुधारते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सर्वसम्मति से फैसला दिया और विवादित ढांचा तोड़े जाने के कारण मस्जिद निर्माण के लिए अलग से पांच एकड़ भूमि के आवंटन का निर्देश दिया है वह अभूतपूर्व कहा जा सकता है।
दरअसल न्यायिक इतिहास में भी यह ऐतिहासिक घटना है जो देश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को एकजुटता के सूत्र में बांधेगी। और उससे भी बढ़कर जिस तरह हर संप्रदाय के लोगों ने इस फैसले को स्वीकार किया है उससे आपसी समझ और सम्मान की गांठ मजबूत होगी। दिल से इस फैसले को स्वीकार करने पर राम राज्य वापस आ जाएगा ऐसा तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन इसकी शुरुआत जरूर हो सकती है। देश ने इस बार शांति और सद्भाव के साथ इसकी जबरदस्त झलक दिखाई है।
5 बड़े फैसले के 5 बड़े मतलब
हिंदुओं के लिए मंदिर निर्माण का रास्ता खुलने के बाद देश के हिंदू समुदाय की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुई। अयोध्या और राममंदिर का उनके लिए विशेष महत्व है।
मुस्लिम समाज के लिए
एक अहम मामले का सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर समाधान हुआ और जिस तरह पांच जजों की संविधान पीठ ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की बात कही उससे यह नहीं कहा जा सकता कि मुस्लिम समाज के हाथ खाली रहे।
सरकार के लिए
दो सबसे बड़े समुदायों से संबंधित इस धार्मिक मामले का अदालती फैसला आ जाने के कारण सरकार के स्तर पर कोई कदम उठाए जाने की सूरत खत्म हो गई। अब उसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन सुनिश्चित करना है।
देश के लिए
अगर इतना संवेदनशील मामला अदालत के स्तर पर सार्थक और निर्णायक तरीके से निपट सकता है तो यह एक देश के रूप में भारत के लिए गौरव बढ़ाने वाली बात है। इस मामले की अहमियत इसी से समझी जा सकती है कि भावी सीजेआइ ने इसे दुनिया के सबसे बड़े मामलों में से एक बताया था।
राजनीति के लिए
भारत में राजनीति की आलोचना करने वाले अक्सर ध्रुवीकरण के मामलों को गिनाने लगते हैं। अयोध्या मामला तो इस सियासत की धुरी रहा है। इतने बड़े विवाद का शांतिपूर्ण समाधान वोट बैंक की सियासत पर कुछ अंकुश लगाने का काम कर सकता है।
9 का कनेक्शन राम मंदिर मामले से
9 नवंबर 1989 को मंदिर के लिए शिलान्यास
9 मई 2011 को मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला
सबसे बड़ा फैसला
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
राम जन्मभूमि का अंदर और बाहरी अहाता यानी पूरी जमीन मंदिर बनाने के लिए दी
केंद्र सरकार तीन महीने के भीतर न्यास या बोर्ड का गठन करेगी
राम जन्मस्थान का बाहर और अंदर का अहाता गठित ट्रस्ट या बोर्ड को सौंपा जाएगा
ट्रस्ट या बोर्ड को मंदिर निर्माण से लेकर बाकी सभी अधिकार होंगे
गोपाल विशारद को निधन के 33 साल बाद मिला पूजा का हक
गैर कानूनी ढंग से मुसलमानों की मस्जिद तोड़े जाने पर उन्हें पुनर्वासित करने के लिए कोर्ट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन वैकल्पिक जगह पर आवंटित करने का दिया आदेश
सुन्नी वक्फ बोर्ड को आवंटित जमीन पर मस्जिद बनाने की छूट होगी
मुसलमानों को पांच एकड़ जमीन या तो केंद्र सरकार अधिगृहीत जमीन में से देगी या फिर राज्य सरकार अयोध्या में किसी उचित और प्रमुख जगह पर जमीन देगी
1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश गैरकानूनी ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमीन के बंटवारे से न तो पक्षकारों के हित उद्देश्य पूरे होते हैं और न ही ये स्थायी शांति और सद्भाव को पूरा करते हैं
निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज किया गया लेकिन केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट में अखाड़े को उचित प्रतिनिधित्व दे
राम जन्मभूमि राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज थी