Monday, 14 September 2026 | 10:08 PM
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पर्यावरण के खातिर, साथ मिलकर लाएंगे बदलाव: आदर्श कुमार (सम्पादक दस्तक मीडिया ग्रुप)

पर्यावरण और व्यवस्था दोनों का एक-दूसरे पर गहरा प्रभाव है। जहां एक ओर पर्यावरण हमारे जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों का स्रोत है, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था (राजनीतिक, सामाजिक, और आर्थिक) पर्यावरण की स्थिति को प्रभावित करती है। वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण
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पर्यावरण के खातिर,  साथ मिलकर लाएंगे बदलाव: आदर्श कुमार (सम्पादक दस्तक मीडिया ग्रुप)
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पर्यावरण और व्यवस्था दोनों का एक-दूसरे पर गहरा प्रभाव है। जहां एक ओर पर्यावरण हमारे जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों का स्रोत है, वहीं दूसरी ओर व्यवस्था (राजनीतिक, सामाजिक, और आर्थिक) पर्यावरण की स्थिति को प्रभावित करती है। वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारों, समाज और संस्थाओं के सहयोग से ही संभव है।

संपूर्ण ब्रहमांड में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ज्ञात गृह है, जहां पर्यावरण उपस्थित है और जिसके कारण जीवन उपस्थित है। जब से मानव सभ्यता प्रारंभ हुई है, तब से लेकर आज तक पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। बढ़ते पारिस्थितिकी संकट के कारण पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी नैतिक बहस निरंतर बढ़ती जा रही है। दुनिया भर में पर्यावरण के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच जंगल और पेड़ों को बचाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। खासतौर पर विकास के नाम पर पेड़ों को व्यापक पैमाने पर काटने पर न केवल तीखे सवाल उठे हैं, बल्कि इस मसले पर आंदोलन भी खड़े हो रहे हैं। लेकिन पेड़ों को बचाने की चिंता के बीच शायद ही इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि आज इन्हें काटे जाने का एक बड़ा कारण कागजों का बढ़ा इस्तेमाल भी है। गौरतलब है कि कागज तैयार करने के काम में आने वाले पेड़ों की कटाई आज एक बड़ी समस्या हो चुकी है और तेजी से कटते पेड़ पर्यावरण के संकट को और बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा इंसान ईंधन, सड़क निर्माण, खेती इत्यादि के लिए भी पेड़ काट रहा है। हाँ पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कभी कभार देश में बढ़े स्तर पर पौधा रोपण अभियान चलाया जाता है लेकिन कुछ को छोड़कर पौधा रोपण के बाद उनकी देखभाल सही से नहीं हो पाती है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये सभी चला रहा है तो अब तक देश में पर्यावरण संरक्षण की तस्वीर में आशा के अनुरूप सुधार क्यों नहीं आ सका? आखिर क्यों जल, जंगल, जमीन की तस्वीर बीते वर्षों में सुधर नहीं सकी? आखिर क्यों जंगल धधक रहे हैं? शहर-शहर कचरे के अंबार क्यों लगे हैं? नदियां क्यों मैली हो रही हैं? हवा क्यों जहरीली बन गई है?

आज पर्यावरण संरक्षण का उतना ही महत्व है जितना मानव जीवन का। हम एक संकल्प लें कि अपनी ओर से पर्यावरण को संरक्षित करें। न केवल नए पौधे लगाएं बल्कि पुराने पेड़ों के संरक्षण का भी प्रयास करें। जलस्त्रोतों को संरक्षित करने में आगे आएं। विदेशों में आप देखेंगे कि सड़क के दोनों ओर हरियाली नजर आती है लेकिन अपने देश में सड़क के दोनों ओर पॉलीथिन उड़ते नजर आ जाएगी। सड़क पर दौड़ती कार के शीशे से चिप्स के रैपर, पॉलीथिन फेंकने वाले लोग भी हम ही हैं। वन्यजीवों के प्रति भी हमारे कान बंद हो गए हैं। चिड़िया पानी के बगैर तड़प रही हैं। पर्यावरण में पेड़ लगाने के साथ-साथ पारिस्थिति तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए आगे आएं। पेड़ों की रक्षा वैसे ही करनी चाहिए जैसे हम अपने बच्चों की करते हैं। ऐसी वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो। जैसे विषैली गैसें पर्यावरण में ना छोड़ें। प्लास्टिक का प्रयोग न करें साथ ही सरकारें भी प्लास्टिक उत्पादन पर रोक लगाएं। आज हमें जन आंदोलन की तरह इसे लेना होगा। हमें अपने अंत:करण से आवाज आनी चाहिए कि हमें पर्यावरण को बचाना है उसको संरक्षित करना है ताकि आने वाली पीढ़ी की रक्षा की जाए अर्थात हम उन्हें विरासत में क्या दें करके जाएंगे हमारा प्रयास यही होना चाहिए कि हम उन्हें विरासत में एक स्वच्छ वातावरण दें, आइये पर्यावरण संरक्षण का प्रण लें, साथ मिलकर लाएंगे बदलाव।