Monday, 14 September 2026 | 6:18 PM
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बरेली : डेढ़ साल बाद नसीब हुआ कंकालों को अंतिम संस्कार

बरेली : बरेली की तहसील मीरगंज के गांव पैगानगरी मे एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आयी है आपको बता दे कि करीब एक साल पहले महज मकान और प्रोपर्टी के चक्कर में दामाद और बेटी ने अपने ही माँ ,बाप और दो बहनों को मारकर घर के अंदर ही गाड़ दिया ,आरोपी पति पत्नी अगर 25 अगस्त को संपत्ति पर अपना हक जमा करने के लिए ग
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बरेली : डेढ़ साल बाद नसीब हुआ कंकालों को अंतिम संस्कार
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बरेली : बरेली की तहसील मीरगंज के गांव पैगानगरी मे एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आयी है आपको बता दे कि करीब एक साल पहले महज मकान और प्रोपर्टी के चक्कर में दामाद और बेटी ने अपने ही माँ ,बाप और दो बहनों को मारकर घर के अंदर ही गाड़ दिया ,आरोपी पति पत्नी अगर 25 अगस्त को संपत्ति पर अपना हक जमा करने के लिए ग्राम पैगानगरी नही आते तो यह 4 हत्याओं का राज राज ही रह जाता ।

बता दे कि मृतक हीरालाल की बड़ी बेटी ने प्रेम विवाह शीशगढ़ के एक गांव के रहने वाले नरेंद्र गंगवार से किया था,नरेंद्र और उसकी पत्नी की शादी के बाद से ही अपनी सास ससुर से संपत्ति को लेकर झगड़ा होता रहता था ।

लोगो ने बताया कि करीब पंद्रह साल पहले हीरालाल अपने गांव की जमीन दुर्गाप्रसाद को बटाई पर देकर रुद्रपुर चले गए थे ,वहां पर दामाद नरेंद्र और उसकी बड़ी बेटी ने करीब एक साल पहले अपने सास ससुर के साथ दोनो बेटियों को इतना मारा कि उनकी मौके पर ही मौत हो गयी जिसके बाद दामाद और बेटी ने चारों लोगो के शवो को घर के अंदर ही गाड़ दिए।

एक साल बाद जब बटाईदार ने हीरालाल और उनकी पत्नी बेटियों के बारे में पूछा तो नरेंद्र गंगवार और उसकी पत्नी ने कहानियां बनाकर सबकी अलग अलग मौत की बात कही जिसके बाद बटाईदार को शक हुआ ओर उंन्होने रुद्रपुर जाकर पड़ताल की ,घर बंद होने पर उंन्होने पड़ोसियों से जानकारी प्राप्त की तो पड़ोसियों ने बताया कि 1 साल से यह मकान नही खुला है जिसके बाद दुर्गाप्रसाद का शक और यकीन मे बदल गया ,उंन्होने पुलिस को इसकी सूचना दी जिसके बाद रुद्रपुर की पुलिस ने नरेंद्र से शक्ति से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने और पत्नी ने मिलकर अपने सास ससुर और दो बेटियों की हत्या करके चारो लोगो के शवों को घर के अंदर ही गाड़ दिए हैं जिसके बाद पुलिस ने घर पहुंच चारो शवो को बरामद कर हत्या का खुलासा किया।

रविवार को ग्राम पैगानगरी मे चारों कंकाल शवों का अंतिम संस्कार किया गया जिसके बाद करीब एक साल बाद चारों लोगो की भटकती आत्माओं को शांति मिली ।