Monday, 14 September 2026 | 9:19 PM
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बाराबंकी: कवरेज करने गए पत्रकारों पर प्रधान व प्रधान समर्थकों द्वारा किया गया जानलेवा हमला

कोतवाली रामसनेही घाट के अंतर्गत ग्राम मुरारपुर में ग्राम प्रधान व उनके समर्थकों ने कवरेज के लिए आए हुए पत्रकारों पर जानलेवा हमला बोल दिया। जानकारी के मुताबिक ग्राम मुरारपुर में विवाहिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, इसकी सूचना ग्रामीणों ने पत्रकारों को दिया महिला की मौत की सूचना पत्रकारों को मि
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कोतवाली रामसनेही घाट के अंतर्गत ग्राम मुरारपुर में ग्राम प्रधान व उनके समर्थकों ने कवरेज के लिए आए हुए पत्रकारों पर जानलेवा हमला बोल दिया। जानकारी के मुताबिक ग्राम मुरारपुर में विवाहिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, इसकी सूचना ग्रामीणों ने पत्रकारों को दिया महिला की मौत की सूचना पत्रकारों को मिलते मुरारपुर गांव पहुंचे और पत्रकार ने जब ग्राम प्रधान से पूछा कि यहां कोई घटना घटित हुई है तो ग्राम प्रधान ने कुछ ना बताते हुए पत्रकारों पर ग्राम प्रधान डॉक्टर राम शरण वर्मा व प्रधान समर्थकों ने गाली - गलौज व मारपीट करने लगे जिसमें पत्रकार मनीष सिंह को व उनके साथियों को लाठी-डंडों व लात - घूंसों से पत्रकारों पर हमला कर दिया एवं पत्रकार मनीष सिंह के 4600 रुपये सहित पर्स, मोबाइल व सोने की चेन आदि छीन लिया गया। पीड़ित पत्रकारों ने कोतवाली राम सनेही घाट में लिखित तहरीर दी परन्तु पुलिस द्वारा न ही पीड़ित पत्रकारों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया।
ज्ञात हो कि मंगलवार की शाम मुरारपुर निवासी विक्रम की 25 वर्षीय पत्नी का शव कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में लटकता मिला था । जिसकी सूचना मिलने पर क्षेत्रीय पत्रकार समाचार संकलन करने मुरारपुर गये जहां पर प्रधान रामशरण वर्मा, लल्लन, चौधरी, रिंकू, पप्पू मैकू मुकुल इंद्रमणि विमलेश खन्नू पप्पू यादव सहित दर्जनों अज्ञात लोगों ने पत्रकारों पर जान लेवा हमला कर दिया व मारपीट कर लहूलुहान कर दिया। अपने को घिरा देख पत्रकार मौके से अपनी जान बचाकर किसी तरह वहां से भाग निकलें। पत्रकारों ने मारपीट की सूचना डायल 112 पर दी । प्रधान व उनके समर्थकों द्वारा पत्रकारों की छीनी हुई बाइक मौके पर पहुँची पी आर वी ने पत्रकारों को सौंप दी। इस घटना से क्षेत्रीय पत्रकारों में रोष व्याप्त है ।अभी भी पत्रकारों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस प्रकरण को लेकर क्षेत्रीय पत्रकारों द्वारा प्रशासन को चेतावनी भी दी गई है अगर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता तो वह जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर कोविड नियमों का पालन करते हुए अनशन शुरू करेंगे। अब देखना यह है कि प्रकरण का उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने पर आरोपियों के खिलाफ क्या कार्यवाही करते हैं क्या पत्रकार को न्याय मिल पाता है या नहीं ? योगी सरकार पत्रकारों पर सुरक्षा के नए नए कानून बनाती रहती है लेकिन जब पत्रकारों पर हमला होता है तो प्रशासन दूर जाकर खड़ा होता है क्या योगी सरकार की यही सुरक्षा व्यवस्था है ? रोज आए दिन कहीं न कहीं पत्रकारों पर हमला होते रहते हैं। ऐसा मामला पहली बार नहीं आए दिन जगह - जगह पत्रकारों को झेलना पड़ता है। दिन-रात पत्रकार अपना योगदान जनता की सेवा करने में लगा देते हैं परन्तु जब उनकी सुरक्षा की बात आती है तो शासन - प्रशासन मुंह मोड़ लेता है।
खैर अब देखना यह है कि संविधान का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला मीडिया अर्थात् पत्रकार को किस प्रकार से न्याय मिलता है।

संवादाता अंकित यादव