Monday, 14 September 2026 | 8:07 PM
India

वाराणसी: बीएचयू में गौतम बुद्ध पर 200 से अधिक शोध प्रस्तुत, 9 देशों और 24 राज्यों के इतिहासकारों ने किया मंथन

वाराणसी:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 मार्च 2026 गौतम बुद्ध के जीवन, विचारों और बौद्ध धर्म के वैश्विक प्रभाव पर Banaras Hindu University (बीएचयू) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस सम्मेलन में 9 देशों और भारत के 24 राज्यों से आए इतिहासकारों, शोधकर्ताओं
Share:
वाराणसी: बीएचयू में गौतम बुद्ध पर 200 से अधिक शोध प्रस्तुत, 9 देशों और 24 राज्यों के इतिहासकारों ने किया मंथन
Read in your preferred language.

वाराणसी:(द दस्तक 24 न्यूज़) 14 मार्च 2026 गौतम बुद्ध के जीवन, विचारों और बौद्ध धर्म के वैश्विक प्रभाव पर Banaras Hindu University (बीएचयू) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस सम्मेलन में 9 देशों और भारत के 24 राज्यों से आए इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने भाग लिया और बौद्ध इतिहास, संस्कृति तथा दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की।

बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस सम्मेलन का विषय “दक्षिण एशिया में बौद्ध धर्म की खोज : विस्तार, पुरातत्व, कला, वास्तुकला और सांस्कृतिक प्रभाव” रखा गया था। तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम में दुनियाभर के विशेषज्ञों ने बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक और समकालीन मुद्दों पर अपने शोध प्रस्तुत किए।

सम्मेलन में अमेरिका के वैज्ञानिक Frederick L. Coolidge ने मनोविज्ञान और पुरातत्व के आपसी संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन दोनों विषयों के समन्वय से प्राचीन मानव समाज के व्यवहार, उसकी वास्तविक क्षमताओं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और सामाजिक संरचनाओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

प्रस्तुत शोधों में बौद्ध इतिहास, पुरातत्व, कला, वास्तुकला, साहित्य, दर्शन और विभिन्न संस्कृतियों के बीच बौद्ध धर्म की अंतःक्रियाओं जैसे विषयों पर विस्तृत अध्ययन शामिल थे। कई शोधों में यह भी सामने आया कि बौद्ध सिद्धांत और बुद्ध का अहिंसा एवं करुणा का संदेश आज भी वैश्विक संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सम्मेलन में Nav Nalanda Mahavihara के कुलपति Siddharth Singh ने कहा कि बौद्ध दर्शन केवल प्राचीन इतिहास का विषय नहीं है, बल्कि आज के समय में भी सामाजिक और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मार्गदर्शन देता है।

कार्यक्रम की संयोजक प्रो. Sujata Gautam ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत शोध भविष्य में बौद्ध अध्ययन और दक्षिण एशियाई इतिहास के नए आयाम खोलेंगे।

सम्मेलन के समापन के साथ ही यह स्पष्ट हुआ कि गौतम बुद्ध की शिक्षाएं और बौद्ध संस्कृति आज भी विश्व स्तर पर शोध और चिंतन का महत्वपूर्ण विषय बनी हुई हैं।