Monday, 14 September 2026 | 6:25 PM
India

बंगाल के 23 में से नौ जिलों में खाता नहीं खोल पाई TMC

पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में से 9 जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का पूरी तरह सफाया कर दिया और इन क्षेत्रों की सभी 68 सीटों पर जीत हासिल की। इसी के साथ भाजपा ने इस बड़े चुनाव में राज्य को पूरी तरह अपने रंग में रंग दिया। राज्य में पहली बार सत्ता में आने वाली भाजपा के
Share:
बंगाल के 23 में से नौ जिलों में खाता नहीं खोल पाई TMC
Read in your preferred language.

पश्चिम बंगाल के 23 जिलों में से 9 जिलों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का पूरी तरह सफाया कर दिया और इन क्षेत्रों की सभी 68 सीटों पर जीत हासिल की। इसी के साथ भाजपा ने इस बड़े चुनाव में राज्य को पूरी तरह अपने रंग में रंग दिया। राज्य में पहली बार सत्ता में आने वाली भाजपा के लिए इन नौ जिलों का जनादेश यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनाव प्रचार में जो कहा था कि टीएमसी कई जिलों में खाता नहीं खोल पाएगी, वह सही साबित हुआ। भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया। वहीं, 15 साल से सत्ता में रही टीएमसी करीब 80 सीटों पर सिमट गई। इस नतीजे के साथ भाजपा ने पूर्वी भारत के अपने आखिरी बड़े गढ़ को भी जीत लिया और 'अंग, बंग और कलिंग' यानी बिहार, बंगाल और ओडिशा में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। भाजपा के प्रदर्शन में सबसे ऊपर पूर्व मेदिनीपुर जिला रहा, जहां पार्टी के प्रमुख नेता शुभेंदु अधिकारी ने पूरी तरह दबदबा बना दिया। भाजपा ने यहां सभी 16 सीटें जीत लीं, जबकि पिछले चुनाव में उसने 15 सीटें जीती थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद से शुभेंदु अधिकारी का प्रभाव लगातार बढ़ा है, खासकर उनके गृह क्षेत्र कांथी में। 2026 के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया कि अब जिले पर उनकी पकड़ पूरी तरह मजबूत हो चुकी है।

उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भी टीएमसी और उसके सहयोगी कोई असर नहीं डाल पाए। इन चार जिलों की 18 सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। पूरे उत्तर बंगाल में 54 सीटों में से 40 सीटें भाजपा ने जीतीं, जबकि यहां टीएमसी की सीटें घटकर 23 से सिर्फ 14 रह गईं। अब जब पहाड़ी क्षेत्रों की सभी सीटें भाजपा के पास हैं, तो गोरखा प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह संस्था ममता बनर्जी सरकार के समर्थन से चलती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान 'संविधान के दायरे में पहाड़ों की समस्याओं का स्थायी समाधान' देने का वादा किया था। इसे भाजपा सांसद राजू बिस्टा ने जीटीए खत्म करने के संकेत के रूप में देखा। टीएमसी के सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के प्रमुख अनित थापा ने हार का कारण राज्य में हुए 'सरकार के खिलाफ वोट' को बताया। अनित थापा जीटीए के प्रमुख भी हैं।