Monday, 14 September 2026 | 6:25 PM
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बीमार-बुजुर्ग कैदियों की समय से पहले रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और शारीरिक रूप से असमर्थ कैदियों की जल्द रिहाई ने ऐतिहासिक आदेश दिया है. कोर्ट ने इस तरह कैदियों की समय से पहले या दया के आधार पर रिहाई के लिए एक पारदर्शी और आसान प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया है. सभी राज्यों से कहा गया है कि वह 3 महीने के भीतर इस बारे में नीति तैय
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बीमार-बुजुर्ग कैदियों की समय से पहले रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
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बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और शारीरिक रूप से असमर्थ कैदियों की जल्द रिहाई ने ऐतिहासिक आदेश दिया है. कोर्ट ने इस तरह कैदियों की समय से पहले या दया के आधार पर रिहाई के लिए एक पारदर्शी और आसान प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया है. सभी राज्यों से कहा गया है कि वह 3 महीने के भीतर इस बारे में नीति तैयार कर ले. बुजुर्ग और लाइलाज बीमारी से जूझ रहे कैदियों की रिहाई को लेकर यह याचिका राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने पिछले साल दाखिल की थी. याचिका में कहा गया था हर राज्य में ऐसे कैदियों की रिहाई के लिए नियम मौजूद हैं. लेकिन उसकी प्रक्रिया बहुत जटिल है और रिहाई में काफी लंबा समय लगता है.

NALSA ने अपनी याचिका में देश भर की जेलों में बंद 70 से अधिक उम्र के ऐसे बुजुर्ग कैदियों की पहचान की व्यवस्था बनाने की मांग की जो एचआईवी, कैंसर, एड्स और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. याचिका में यह मांग भी की गई कि ऐसे कैदियों को पैरोल, फरलो या ज़मानत पर रिहा करने के लिए आसान प्रक्रिया बनाई जाए. याचिका पर विचार के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस मामले में उसका दखल जरूरी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने आदेश में लिखा है, 'प्रक्रिया के चलते होने वाली देरी के कारण कैदियों को अपने अंतिम दिन सलाखों के पीछे बिताने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.'