Monday, 14 September 2026 | 5:38 PM
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फर्रुखाबाद:दरीबा पश्चिम में माता काली देवी मंदिर पर 47वां विशाल देवी जागरण संपन्न, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 मार्च 2026 नवरात्र के पावन अवसर पर जनपद के दरीबा पश्चिम स्थित माता काली देवी मंदिर में 47वां भव्य देवी जागरण एवं महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह धार्मिक आयोजन पिछले 47 वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है, जो क्षेत्र की आस्था और परंपरा
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फर्रुखाबाद:दरीबा पश्चिम में माता काली देवी मंदिर पर 47वां विशाल देवी जागरण संपन्न, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
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फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 26 मार्च 2026 नवरात्र के पावन अवसर पर जनपद के दरीबा पश्चिम स्थित माता काली देवी मंदिर में 47वां भव्य देवी जागरण एवं महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह धार्मिक आयोजन पिछले 47 वर्षों से निरंतर आयोजित होता आ रहा है, जो क्षेत्र की आस्था और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।

कार्यक्रम का शुभारंभ अमृतपुर विधानसभा के विधायक सुशील शाक्य ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

जागरण में सरगम म्यूजिकल पार्टी (कानपुर) के कलाकारों ने भक्ति गीतों और मनमोहक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकियों को देखकर विशेष रूप से महिलाओं ने जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट की, जिससे पूरा पंडाल गूंज उठा।

मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। कानपुर, आगरा, मैनपुरी, इटावा, छिबरामऊ सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में भक्तगण शामिल हुए। श्रद्धालु सुबह से लेकर देर रात तक मां के दरबार में पूजा-अर्चना करते रहे, जबकि जागरण का कार्यक्रम पूरी रात चलता रहा।

इस आयोजन में महर्षि वाल्मीकि संस्कार समिति की अहम भूमिका रही। समिति के संस्थापक प्रताप सिंह (गुरुजी), संरक्षक करतार सिंह, अध्यक्ष पवन कुमार सहित कमेटी के पदाधिकारी—प्रदीप कुमार, मुकुल, अंशुल, गौरव, देवू उर्फ मल्लू, अमरदीप, विक्की सिंह, दिलीप गुप्ता, संदीप शाक्य, सुरजीत सैदा एवं अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करने का माध्यम साबित हुआ।