Monday, 14 September 2026 | 5:36 PM
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फर्रुखाबाद में गड्ढों की सड़क बनी मौत का जाल, प्रशासन अब एक और मौत का इंतजार कर रहा

फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 20 जनवरी 2026 जनपद में सड़क के गड्ढों के कारण 8 वर्षीय बालिका की मौत के बाद भी प्रशासन ने केवल गिट्टी डालकर खानापूर्ति की। जसमई चौराहे पर हालात और खतरनाक हो गए हैं, जिससे एक और हादसे की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश
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फर्रुखाबाद में गड्ढों की सड़क बनी मौत का जाल, प्रशासन अब एक और मौत का इंतजार कर रहा
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फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज़) 20 जनवरी 2026 जनपद में सड़क के गड्ढों के कारण 8 वर्षीय बालिका की मौत के बाद भी प्रशासन ने केवल गिट्टी डालकर खानापूर्ति की। जसमई चौराहे पर हालात और खतरनाक हो गए हैं, जिससे एक और हादसे की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के जनपद में प्रशासन की घोर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां एक मासूम बालिका की मौत के बाद भी सड़क की मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। जर्जर सड़कें अब भी मौत को न्योता दे रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

बीते 17 जनवरी 2026 को दोपहर के समय जसमई चौराहे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ। ई-रिक्शा पर सवार एक परिवार स्टेशन की ओर जा रहा था। इसी दौरान सड़क पर बने गहरे गड्ढे में ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गया। ई-रिक्शा में 5 से 6 लोग सवार थे, जिनमें तेजस्वी नामक 8 वर्षीय बालिका गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

इस हादसे ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह सड़क पहले से ही जर्जर हालत में थी। इस मुद्दे को लेकर दस्तक के मंडल संवाददाता  अर्पित शाक्य ने पहले भी कई बार सवाल उठाए थे, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नतीजा एक मासूम की मौत के रूप में सामने आया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बालिका की मौत के बाद भी प्रशासन ने सड़क की सही मरम्मत कराने के बजाय सिर्फ गड्ढों में ढीली गिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी। यह घटना 3 दिन पहले की है लेकिन अभी भी सड़क सही नहीं की गई है। हालात यह हैं कि गिट्टी इतनी ढीली है कि उस पर से गुजरने वाले वाहन फिसल सकते हैं या आपस में टकरा सकते हैं। यानी अब यह सड़क पहले से ज्यादा खतरनाक हो चुकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन को किसी और मौत का इंतजार है। सवाल यह भी है कि क्या आम आदमी की जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है कि हर बार हादसे के बाद सिर्फ अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है? अगर समय रहते स्थायी समाधान किया गया होता, तो शायद एक मासूम की जान बच सकती थी।

जसमई चौराहे पर बने हालात यह साफ संकेत दे रहे हैं कि प्रशासनिक लापरवाही भविष्य में और बड़े हादसों को जन्म दे सकती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं, या फिर किसी और जान के जाने के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।