Monday, 14 September 2026 | 6:19 PM
India

चीन ने रचा इतिहास: दिन के उजाले में लेजर से मापी पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी।

चीन:(द दस्तक 24 न्यूज़) 29 जुलाई 2025  चीन ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार किसी देश ने दिन के उजाले में लेजर तकनीक की मदद से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी को सटीकता से मापा है। यह सफलता न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि उपग्रह न
Share:
चीन ने रचा इतिहास: दिन के उजाले में लेजर से मापी पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी।
Read in your preferred language.

चीन:(द दस्तक 24 न्यूज़) 29 जुलाई 2025  चीन ने विज्ञान और तकनीक की दुनिया में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार किसी देश ने दिन के उजाले में लेजर तकनीक की मदद से पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी को सटीकता से मापा है। यह सफलता न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि उपग्रह नेविगेशन, वैज्ञानिक मापन और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी साबित हो सकती है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

लेजर रेंजिंग (Laser Ranging) एक ऐसी तकनीक है जिसमें पृथ्वी से एक शक्तिशाली लेजर बीम चंद्रमा की सतह की ओर भेजी जाती है। यह बीम जब चंद्रमा पर लगे विशेष रेट्रोरिफ्लेक्टर (दर्पण) से टकराकर वापस लौटती है, तो उस समय अंतराल को मापकर पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी बेहद सटीकता से मापी जाती है।

अब तक यह मापन केवल रात के अंधेरे में ही संभव था, क्योंकि दिन में सूर्य की रोशनी लेजर सिग्नल को बाधित कर देती थी। लेकिन चीन ने इस बाधा को पार करते हुए दिन में भी यह माप लेने में सफलता पाई है।

चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी

औसत दूरी: 384,400 किलोमीटर

निकटतम दूरी (Perigee): लगभग 363,300 किलोमीटर

दूरस्थ दूरी (Apogee): लगभग 405,500 किलोमीटर

 इस उपलब्धि के प्रमुख लाभ:

1. उच्च सटीकता: लेजर तकनीक से मिली दूरी बेहद सूक्ष्म स्तर तक सटीक होती है, जो वैज्ञानिक प्रयोगों की विश्वसनीयता बढ़ाती है।

2. दिन में भी मापन संभव: अब यह तकनीक 24 घंटे उपलब्ध रहेगी, जिससे डाटा कलेक्शन में गति आएगी।

3. अंतरिक्ष अनुसंधान को गति: चंद्रमा, ग्रहों, और उपग्रहों की सटीक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकेगा।

4. नेविगेशन में सुधार: उपग्रहों की लोकेशन को और अधिक सटीक तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा, जिससे जीपीएस सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी।

5. भविष्य के मिशनों के लिए मददगार: यह तकनीक अंतरिक्ष मिशनों की योजना और प्रक्षेपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 लेजर तकनीक के विविध उपयोग:

◆चिकित्सा क्षेत्र:सर्जरी और कैंसर उपचार में, उद्योग: माप, कटाई, और मटेरियल प्रोसेसिंग में

◆सैन्य: लक्ष्य निर्धारण और निगरानी प्रणालियों में

◆संशोधित उपग्रह संचार: अधिक सुरक्षित और तेज डेटा ट्रांसमिशन के लिए

निष्कर्ष

चीन की यह सफलता केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा में बढ़ाया गया एक साहसिक कदम है। दिन के उजाले में लेजर से चंद्रमा की दूरी मापने की क्षमता अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में नए अध्याय की शुरुआत है। इससे पृथ्वी के बाहर की दुनिया को समझने में नई रोशनी मिलेगी और मानवता को अंतरिक्ष में और भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।