Monday, 14 September 2026 | 6:21 PM
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: चुनाव आयोग ने 48 घंटे की ‘साइलेंस पीरियड’ और एग्जिट पोल पर लगाई रोक

नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 अक्टूबर 2025 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार विधानसभा और उपचुनावों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी करते हुए मीडिया और राजनीतिक दलों को सख्त चेतावनी दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान से पहले की 48 घंटे की अवधि, जिसे साइलेंस पीरियड कहा जाता है, के दौरान किसी
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: चुनाव आयोग ने 48 घंटे की ‘साइलेंस पीरियड’ और एग्जिट पोल पर लगाई रोक
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नई दिल्ली:(द दस्तक 24 न्यूज़) 27 अक्टूबर 2025 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार विधानसभा और उपचुनावों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी करते हुए मीडिया और राजनीतिक दलों को सख्त चेतावनी दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान से पहले की 48 घंटे की अवधि, जिसे साइलेंस पीरियड कहा जाता है, के दौरान किसी भी प्रकार की चुनावी सामग्री का प्रसारण, प्रचार या चर्चा करना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।

चुनाव आयोग के प्रेस नोट के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे — पहला चरण 6 नवंबर 2025 (गुरुवार) और दूसरा चरण 11 नवंबर 2025 (मंगलवार) को।

? 48 घंटे का ‘साइलेंस पीरियड’

आयोग ने Representation of the People Act, 1951 की धारा 126(1)(b) का हवाला देते हुए कहा कि मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार के चुनावी विषय को टीवी, रेडियो, केबल नेटवर्क या अन्य माध्यमों से प्रसारित करना कानूनन अपराध होगा।

इस अवधि में पैनल चर्चा, बहस, अपील या किसी भी उम्मीदवार या पार्टी को बढ़ावा देने वाली सामग्री को प्रदर्शित करना निषिद्ध रहेगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि —“इसमें किसी भी प्रकार के ओपिनियन पोल (Opinion Poll) का प्रदर्शन भी शामिल है।”

? एग्जिट पोल पर भी सख्त रोक

आयोग ने धारा 126A के तहत Exit Poll के संचालन और उसके परिणामों के प्रसारण पर भी रोक लगाई है।

यह प्रतिबंध 6 नवंबर 2025 सुबह 7:00 बजे से लेकर 11 नवंबर 2025 शाम 6:30 बजे तक लागू रहेगा।

इस दौरान किसी भी प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा एग्जिट पोल करवाना या उसके परिणाम प्रकाशित करना गैरकानूनी होगा।

उल्लंघन करने वालों पर दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

? मीडिया संस्थानों को आयोग की अपील

निर्वाचन आयोग ने सभी मीडिया संस्थानों से अपील की है कि वे कानून और आचार संहिता की भावना का सम्मान करते हुए इन निर्देशों का पालन करें ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।